केंद्र सरकार ने कोचिंग संचालको पर कसी नकेल

अब 16 वर्ष से कम उम्र के स्टूडेंट कोचिंग सेंटर में नहीं पढ़ सकेंगे, कोचिंग सेंटरों की मनमानी और उनके लिए मानक तय करने को लेकर यह गाइडलाइंस जारी की है

गाँव लहरिया न्यूज / सूचना विभाग

दिखावे और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हर कोई चाहता है कि उनके बच्चे बेस्ट बनें,सपने डॉक्टर बनाने के, इंजीनियर बनाने के, सीए बनाने के, अफसर बनाने के, टॉपर बनाने के बचपन की बेफिक्री वाली उम्र में ही बच्चों पर हम उम्मीदों का बोझ डाल देते हैं कि बड़ा अफसर बनना है, डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बनना है, कई बार हम अपने अधूरे सपनों को बच्चों में जीने लगते हैं, पैरेंट्स की इस सोच के दोहन करने के लिए बड़े शहरों से लेकर छोटे-छोटे कस्बों तक धड़ल्ले से कोचिंग सेंटर उग रहे हैं जहां बेचे जाते हैं सपने, तमाम कोचिंग सेंटर भी फर्जी और गुमराह करने वाले दावों से स्टूडेंट और पैरेंट्स के साथ खिलवाड़ करते हैं, ‘कोटा फैक्ट्री’ नाम की चर्चित वेब सीरीज में इस समस्या को दिखाने की कोशिश हुई थी, हाल ही में आई चर्चित फिल्म ’12th फेल’ में भी इस समस्या की झलक दिखाने की कोशिश हुई थी, फिल्म में दिखाया गया कि यूपीएससी की तैयारी कराने वाला एक कोचिंग सेंटर अपने विज्ञापनों में उन टॉपरों के नाम और तस्वीर का भी इस्तेमाल करता है जो उसके यहां कभी पढ़े ही नहीं थे, अब भारत सरकार ने कोचिंग सेंटरों के लिए कड़े नियम तय किए हैं, कोचिंग सेंटरों के लिए सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइंस की, आखिर गाइडलाइंस में क्या है? कैसे इससे कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर रोक लगेगी? स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को क्या फायदा होगा? आइए समझते हैं.

कोचिंग सेंटरों पर लगाम
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से जारी ‘कोचिंग सेंटरों के पंजीकरण और नियमन के लिए दिशानिर्देश 2024’ का मुख्य उद्देश्य कोचिंग सेंटरों के रजिस्ट्रेशन का फ्रेमवर्क तैयार करना और उनकी मनमानी पर रोक लगाना है, शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी इन व्यापक दिशानिर्देशों से कोचिंग संस्थानों को रेग्युलेट करने, स्टूडेंट्स की चिंताओं को दूर करने और प्राइवेट कोचिंग सेक्टर के अनियंत्रित विकास पर लगाम लगाना है, कोचिंग सेंटरों के लिए अब 16 साल से कम उम्र के स्टूडेंट्स का दाखिला लेने की मनाही है.

कोचिंग सेंटर की परिभाषा
गाइडलाइंस के मुताबिक, ‘कोचिंग सेंटर’ का मतलब उस संस्थान से है जो किसी व्यक्ति द्वारा स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी स्तर के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं या अकादमिक सहायता के लिए कोचिंग देने के लिए स्थापित, चलाया या संचालित किया जाता है, और जिसमें 50 से ज्यादा स्टूडेंट हों, सरल शब्दों में कहें तो, अगर कोई संस्थान 50 से ज्यादा छात्रों को किसी भी तरह की पढ़ाई, परीक्षा या स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी के काम में मदद दे रहा है, तो उसे ‘कोचिंग सेंटर’ माना जाएगा.

अभी क्यों?
स्टूडेंट्स की खुदकुशी के बढ़ते मामलों, आग लगने की घटनाओं और कोचिंग सेंटरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ-साथ उनके पढ़ाने के तरीकों में कमी से जुड़ीं तमाम शिकायतों के बाद सरकार को ये गाइडलाइंस लानी पड़ीं, पिछले साल देश में कोचिंग सेंटर का हब कहे जाने वाले कोटा में 26 कोचिंग स्टूडेंट ने खुदकुशी की थी, ये हाल के वर्षों में कोटा या किसी भी शहर में स्टूडेंट्स की खुदकुशी का अबतक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

सुनहरे भविष्य के सपने नहीं बेच सकेंगे
गाइडलाइंस में स्पष्ट किया गया है कि कोचिंग सेंटर किसी भी तरह के गुमराह करने वाले वादे जैसे रैंक की गारंटी या अच्छे मार्क लाने के जैसे वादे नहीं करेंगे, इसके अलावा वे अपनी कोचिंग क्वॉलिटी और सुविधाओं को लेकर गुमराह करने वाले विज्ञापन जारी नहीं करेंगे.

कौन हो सकता है ट्यूटर?
कोचिंग सेंटर किसी भी ऐसे ट्यूटर या व्यक्ति को भर्ती नहीं कर सकते जो किसी अदालत की तरफ से किसी अपराध के दोषी ठहराए गए हों। इसके अलावा, ट्यूटर के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता भी तय कर दी गई है, अगर कोई व्यक्ति स्नातक और उसके समतुल्य योग्यता नहीं रखता तो उसे कोचिंग सेंटर ट्यूटर के तौर पर नहीं रख सकते हैं.

पारदर्शिता
कोचिंग सेंटरों के लिए अपनी वेबसाइट पर ट्यूटरों के क्वॉलिफिकेशन से जुड़े डीटेल, कोर्सेज, पाठ्यक्रम और शुल्क वगैरह से जुड़े डीटेल को अपडेट रखना अनिवार्य किया गया है, कोई भी शख्स अगर कोचिंग इंस्टिट्यूट की वेबसाइट पर जाए तो उसे वहीं पर जानकारी मिल जाए कि वहां किन-किन कोर्सेज की पढ़ाई हो रही है, फीस क्या है, जो ट्यूटर हैं उनकी योग्यता क्या है, इससे पैरंट्स और स्टूडेंट्स को फैसला लेने में आसानी होगी.

मनमाने ढंग से फीस वसूली पर लगाम
अलग-अलग कोर्स के लिए वसूली जाने वाली ट्यूशन फी वाजिब और तार्किक होनी चाहिए, गाइडलाइंस के मुताबिक, कोचिंग सेंटर जो भी फीस चार्ज करेंगे उसका रसीद उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, अगर कोई स्टूडेंट कोर्स पूरा होने से पहले ही उसे छोड़ता है तो कोचिंग सेंटर को उसे 10 दिनों के भीतर प्रो-राटा आधार यानी आनुपातिक आधार पर रीफंड देना होगा.

गाइडलाइंस का पालन नहीं होने पर पेनाल्टी
गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करने के लिए उसमें कोचिंग सेंटरों पर पेनाल्टी लगाना भी प्रस्तावित है, अगर कोई कोचिंग सेंटर नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा, उस पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, इतना ही नहीं, कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है.

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
सभी कोचिंग सेंटरों को जो पहले से मौजूद हों या फिर नई हों, उनके लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा, कोई कोचिंग सेंटर गाइडलाइंस का उल्लंघन तो नहीं कर रहा, ये देखना राज्य सरकार का काम होगा, कोचिंग सेंटरों की निगरानी करने, रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी मानदंडों पर वे खरी उतरती हैं या नहीं और गाइडलाइंस का पालन हो रहा है या नहीं, ये देखने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी.

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